छत्तीसगढ़ यहां धान के आभूषणों से लोगों को मिला साल में लाखों की आमदनी का रास्ता !

छत्तीसगढ़ यहां धान के आभूषणों से लोगों को मिला साल में लाखों की आमदनी का रास्ता ! धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ प्रदेश में नेक महिला स्व सह

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छत्तीसगढ़
यहां धान के आभूषणों से लोगों को मिला साल में लाखों की आमदनी का रास्ता !

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ प्रदेश में नेक महिला स्व सहायता समूह की संचालक नीरजा स्वामी हलधर ने धान से आभूषण बनाकर गरीब और बेसहारा लोगों को रोजगार देने का बीड़ा उठाया है.
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, बिलासपुर जिले के गौरेला की रहने वाली महिला नीरजा स्वामी ने नेक महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से हस्तकला का नमूना पेश कर एक मिसाल कायम की है.
पिछले 10 सालों से धान के आभूषणों की अलग अलग शहरों में प्रदर्शनी लगाकर नीरजा देश और प्रदेश में छत्तीसगढ़ की एक अलग पहचान बनाने में जुटी हैं.
धान से बनाए गए आभूषण

आपको बता दें कि बेशकीमती आभूषण की तरह चमकते ये गहने नवरत्नों से नहीं बल्कि इन्हें धान और मिट्टी से बनाया गया है. इन्हें बनाने वाले गरीब तबके के लोग हैं जो कबाड़, पन्नी और प्लास्टिक की चीजों को बीनते और उसे बेचकर अपना जीवन यापन करते थे.

ऐसे में नीरजा स्वामी ने इन्हें ट्रेनिंग देकर धान और मिट्टी से गहने बनाने का हुनर सिखाया. उन्होंने इन लोगों को धान और मिट्टी से गले का हार, झुमका आदि बनाना सिखाकर साल में लाखों की आमदनी का रास्ता बताया है.

अब तक इस समूह में करीब 200 से ज्यादा सदस्य जुड़ चुके हैं जो मिट्टी और धान के अलग अलग आभूषण का निर्माण करते हैं. नीरजा स्वामी का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य में उचित दाम नहीं मिलने के कारण वे इन आभूषणों को अन्य राज्यों में बेचने जाते हैं.


अमूनन छत्तीसगढ़ में जो झुमके 50 रुपए में बिकते हैं, उसे वो दिल्ली जैसे शहर में करीब 300 रुपए में बेचते हैं. इतना ही नहीं लोगों द्वारा भी धान और मिट्टी के आभूषणों को खूब पसंद किया जा रहा है. साथ ही इनके कार्य को सराहा भी जा रहा है.

इन आभूषणों का निर्माण धान के भूसे से होने के कारण इनका वजन भी काफी हलका है. बहरहाल, देखने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ की पहचान धान के आभूषण से दिला रही इस महिला के कला को हस्तकला बोर्ड की ओर कोई मदद मिल पाती है या नहीं.

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