अम्बिकापुर : हमर सुघर बेटी अभियान : बालिकाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सषक्त करने का अभियान

अम्बिकापुर 24 नवम्बर 2017 किशोरावस्था तीव्र शारीरिक एवं मानसिक बदलावों की उम्र होती है। इस अवस्था में किषोरियों के मन में जिज्ञासाओं और आशंकाओं के

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अम्बिकापुर 24 नवम्बर 2017

किशोरावस्था तीव्र शारीरिक एवं मानसिक बदलावों की उम्र होती है। इस अवस्था में किषोरियों के मन में जिज्ञासाओं और आशंकाओं के अनगिनत बीज अंकुरित होते हैं। किशोरावस्था मानसिक भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन्हीं बातों को दृष्टिगत रखकर कलेक्टर श्रीमती किरण कौषल के मार्गदर्षन में किषोरी बालिकाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सषक्त करने के उद्देष्य से महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा ष्ष्हमर सुघर बेटी अभियानष्ष् का संचालन किया जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किशोरी बालिकाओं के लिए संचालित सबला योजना से छूटी हुई बालिकाओं के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। किशोरी बालिकाओं को विकास की मुख्य धारा से जोड़नेए शिक्षा के समान अवसर एवं दायित्वों के प्रति सजग करते हुए उनकी सोच में मूलभूत परिवर्तन लानेए आर्थिक गतिविधियों में उनकी अभिरूचि उत्पन्न करनेए आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबन की ओर अग्रेषित करने के उद्देश्य के लिये ष्ष्हमर सुघर बेटी अभियानष्ष् चलाया जा रहा है । यह अभियान 01 जुलाई 2017 से प्रारंभ किया गया है ।
अभियान की विषेषताएं
अभियान के अंतर्गत सरगुजा जिले में संचालित 154 हाई स्कूल तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों एवं 53 कन्या छात्रावास आश्रमों में लगभग 20000 दर्ज बालिकाओं को षामिल किया गया है । इन किशोरी बालिकाओं को महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के पर्यवेक्षको के माध्यम से विभिन्न विषयो पर प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है ।
प्रषिक्षण में व्यक्तिगत स्वच्छता और सफाई तथा शौचालय का प्रयोग एवं डायरिया का प्रकोपए प्रजनन चक्र और मासिक धर्म स्वच्छताए किशोरावस्था में शारीरिकएमानसिक एवं भावनात्मक विकासए किशोरावस्था में पोषण संबंधी आवश्यकता तथा खान.पान संबंधी स्वस्थ आदतेंए किशोरी बालिकाओं का समूह गठन तथा बचत की आदतए बालिका समूहो का बैंक लिंकेजए बाल अधिकार एवं महिलाओं के अधिकार से संबंधित समस्त कानूनए लिंग संवेदनशीलताए गृह प्रबंधनए उच्च शिक्षा का महत्व तथा कैरियर गाईडेंस तथा सामाजिक जागरूकता के बारे में विस्तारपूर्वक बताया जा रहा है।
कार्यक्रम का क्रियान्वयन
कार्यक्रम के प्रथम चरण में किशोरी बालिकाओं का पोषण स्तर ज्ञात करने के लिये चिंहांकित आश्रमध्छात्रावासो एवं शालाओं में दर्ज सभी किशोरी बालिकाओ का वजन एवं ऊँचाई लेकर बीण्एमण्आईण् अर्थात् बॉडी मास इंडेक्स निकाला गया। लगभग 20 हजार 322 किशोरी बालिकाओ का बीण्एमण्आईण् का परीक्षण किया गया। इनमें सामान्य बीण्एमण्आईण् बालिकाओं की संख्या 11 हजार 413ए सामान्य से अधिक बीण्एमण्आईण् बालिकाओं की संख्या 846ए सामान्य से कम बीण्एमण्आईण् बालिकाओं की संख्या 6 हजार 899 पाए गए। इस प्रकार सामान्य से कम बीण्एमण्आईण् बालिकाओं की संख्या 36 प्रतिषत पाई गई।
बीण्एमण्आई परीक्षण के दौरान पाया गया कि आंगनबाड़ी केन्द्र में दर्ज शाला त्यागी किषोरी बालिकाओं की तुलना में शाला जाने वाली किषोरी बालिकाओं का बीण्एमण्आईण्कम पाया गया। शाला जाने वाली किषोरी बालिकाओं के मध्य किए गए सर्वेक्षण से पता चला कि 20 हजार 877 बालिकाओं में से 10 हजार 290 बालिकाएं केवल दो वक्त का भोजन करती हैं। इसके अलावा वे विद्यालय या किसी अन्य स्थान पर कुछ भी नहीं खाती हैं जिससे उनका पोषण स्तर एवं बीण्एमण्आई प्रभावित हो रहा है। शाला जाने वाली किशोरी बालिकाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिये वर्तमान में उन्हें निरंतर पोषण एसंतुलित आहार एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्रियो के समुचित उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है तथा बालिकाओं को कम से कम चार बार भोजन करने के लिये प्रेरित किया जा रहा है तथा शालाओं में उपस्थित बालिकायें दोपहर में भोजन ग्रहण कर सके यह सुनिश्चित करने के लिये उन्हे अपने साथ घरो से टिफिन लाने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। किषोरी बालिकाआें में नेतृत्व क्षमता विकसित करने एवं समुदाय की अन्य बालिकाओं को जागरूक करने के उद्देष्य से 16 से 18 वर्ष की बालिकाओं का ऑरेंज कमाण्डो ग्रुप बनाया गया है। इन बालिकाओं द्वारा अन्य बालिकाओं को षिक्षाए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

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