रायपुर : छत्तीसगढ़ में अब तक 494 राजस्व न्यायालय ई-कोर्ट में तब्दील : प्रदेश में अब तक 3.15 करोड़ राजस्व दस्तावेज कम्प्यूटरों में दर्ज

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अब तक 494 राजस्व न्यायालय ई-कोर्ट में तब्दील : प्रदेश में अब तक 3.15 करोड़ राजस्व दस्तावेज कम्प्यूटरों में दर्ज एक करोड़ से ज्य

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में अब तक 494 राजस्व न्यायालय ई-कोर्ट में तब्दील : प्रदेश में अब तक 3.15 करोड़ राजस्व दस्तावेज कम्प्यूटरों में दर्ज

एक करोड़ से ज्यादा राजस्व अभिलेख डिजिटल हस्ताक्षर के बाद हुए आॅनलाइन
राज्य सरकार ने राजस्व अभिलेखों के लिए बनवाया मोबाइल एप्प
श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने दी अपने विभागों की 14 वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी

रायपुर, 08 दिसम्बर 2017

सूचना प्रौद्योगिकी का बेहतर इस्तेमाल करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी 704 राजस्व न्यायालयों को ई-कोर्ट में बदलने की योजना है। अब तक 494 न्यायालयों को आॅन लाइन करते हुए उन्हें ई-कोर्ट में परिवर्तित कर दिया है। इनमें कलेक्टर कोर्ट से लेकर एसडीओ, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के न्यायालय भी शामिल हैं। शेष राजस्व न्यायालय भी बहुत जल्द ई-कोर्ट में परिवर्तित हो जाएंगे। यह जानकारी आज यहां प्रदेश के राजस्व, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागों के मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने दी।
उन्होंने बताया कि अब राजस्व न्यायालयों में मिलने वाले सभी आवेदन आॅन लाइन ई-कोर्ट में दर्ज होते हैं। आवेदक को उसकी पावती भी दी जाती है। इससे मामलों के निराकरण में तेजी आ रही है और पारदर्शिता भी बढ़ रही है। श्री पाण्डेय ने न्यू सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में अपने विभागों के विगत 14 वर्ष की उपलब्धियों का विभागवार ब्यौरा दिया। उनके साथ उनके विभागों वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। श्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने राजस्व विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विगत चार वर्ष में राजस्व प्रशासन ने पारदर्शिता लाने और प्रशासन को जनोन्मुखी बनाने उनके विभाग द्वारा कई नये और कामयाब प्रयोग (नवाचार) किए गए हैं। भू-अभिलेखों की जानकारी आम जनता तक आसानी से पहुंच सके इसके लिए हमने भुइंयां और भू-नक्शा साफ्टवेयर का एन्ड्रायड वर्जन बनाकर एक मोबाइल एप्प भी तैयार किया है, जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउन लोड कर अपने मोबाइल फोन में इंस्टाल किया जा सकता है। राजस्व मंत्री ने बताया कि अब तक सभी तहसीलों में खोले गए लोक सेवा केन्द्रों में आवेदन प्रस्तुत करने के बाद आवेदक अपनी जमीन के अभिलेखों की कम्प्यूटीकृत नकल प्राप्त करता था, इसके लिए उसे वहां तक आना-जाना पड़ता था। लेकिन अब उसे यह सुविधा आॅनलाइन कहीं पर भी आसानी से मिल जाएगी।
कहीं से भी निःशुल्क डाउन लोड कर सकेंगे राजस्व अभिलेख
श्री पाण्डेय ने बताया – अचल सम्पति के पंजीयन और लेन-देन में पारदर्शिता की दृष्टि से छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों और राजस्व के अन्य अभिलेखों का तेजी से कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। अब तक लगभग तीन करोड़ 15 लाख राजस्व दस्तावेज कम्प्यूटीकृत हो चुके हैं। इनमें से प्रदेश के 19 हजार 125 गांवों के दो करोड़ 17 लाख खसरों, 58 लाख 89 हजार बी-वन और 39 हजार 145 नक्शा शीटों का डिजिटाइजेशन कर लिया गया है। उन्हें आॅनलाइन अपडेट भी किया जा रहा है। इनमें से एक करोड़ से ज्यादा दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर हो चुके हैं। इनमें 90 लाख 64 हजार खसरों के अभिलेख और 19 लाख 03 हजार बी-वन शामिल हैं। इस प्रकार की प्रतिलिपियों को कानूनी मान्यता प्राप्त है। आवेदन करने के साथ दिन के भीतर वांछित अभिलेख की डिजिटल हस्ताक्षर वाली आॅन लाइन प्रतिलिपि साफ्टवेयर में उपलब्ध हो जाएगी। आवेदक कहीं से भी और कभी भी डाउनलोड कर निःशुल्क प्रिंट आउट ले सकता है।
राजस्व न्यायालयों में 70 लाख से अधिक खसरों की
प्रतिलिपि डिजिटल हस्ताक्षर के साथ उपलब्ध
श्री पाण्डेय ने बताया – राजस्व न्यायालयों में अब तक 70 लाख खसरा नम्बरों से संबंधित जमीन की प्रतिलिपि डिजिटल हस्ताक्षरों के साथ उपलब्ध है। और शेष खसरा नम्बरों की जमीन को तीन महीने के भीतर डिजिटल हस्ताक्षरों से सत्यापित करने का लक्ष्य है। श्री पाण्डेय ने यह भी बताया कि जिन खसरा नम्बरों की जमीन के दस्तावेज डिजिटल हस्ताक्षर से सत्यापित नहीं है, उनके नकल कम्प्यूटरीकृत नकल भी घर बैठे आॅन लाइन प्राप्त किए जा सकते हैं।
राज्य में अब ग्यारह नये जिले पांच राजस्व संभाग,
88 राजस्व अनुविभाग, डेढ़ सौ तहसील और 5777 पटवारी हल्के

श्री पाण्डेय ने बताया कि मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के नेतृत्व में सरकार ने आम जनता की सुविधा की दृष्टि से विगत 14 वर्ष में 11 नये जिलों का निर्माण किया गया, जिससे जिलों की संख्या 27 हो गई। वर्ष 2004 में एक भी राजस्व संभाग नहीं था, जबकि जनता की जरूरतों को देखते हुए विगत 14 साल में पांच राजस्व संभागों की स्थापना की गई। राजस्व अनुविभागों की संख्या 61 से बढ़ाकर 88, तहसीलों की संख्या 98 से बढ़ाकर 150, राजस्व निरीक्षक मंडलों की संख्या 229 से बढ़ाकर 283 और पटवारी हल्कों की संख्या 3086 से बढ़कर 5777 तक पहुंच गई।
प्राकृृतिक आपदा पीड़ितों के लिए राहत राशि में वृद्धि
विगत 14 वर्ष में प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदा पीड़ितों की मदद के लिए संवेदनशीलता के साथ राहत राशि में भी काफी वृद्धि की है। इसके लिए आरबीसी 6-4 में संशोधन किया गया है। प्राकृतिक विपदाओं में मृत्यु होने मृतक के परिवार को मिलने वाली राहत राशि एक लाख 50 हजार से बढ़ाकर चार लाख रूपए कर दी गई है। पानी में डूबने या सर्पदंश से होने वाली मृत्यु को भी प्राकृतिक आपदा मानकर ऐसे पीड़ित परिवारों को बढ़ी हुई दर पर राहत राशि दी जा रही है।
अब कोई भी सरकारी काॅलेज भवन विहीन नहीं
उच्च शिक्षा विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए श्री पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश में अब कोई भी सरकारी काॅलेज भवन विहीन नहीं रह गया है। नये काॅलेजों के लिए भी नये भवन स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में राज्य में एक भी केन्द्रीय विश्वविद्यालय नहीं था। मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के विशेष प्रयासों से बिलासपुर में गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। विगत 14 साल में प्रदेश में सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या तीन से बढ़कर आठ हो गई। विगत 14 वर्ष में राज्य में 116 से ज्यादा नये सरकारी काॅलेज खोले गए। इस दौरान सरकारी और प्राइवेट मिलाकर काॅलेजों की संख्या 184 से बढ़कर 439 हो गई। आज की स्थिति में प्रदेश में 221 सरकारी काॅलेज संचालित हो रहे हैं। नये काॅलेजों में से 58 की स्थापना दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में की गई है। उन्होंने बताया कि छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या में इस अवधि में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। राज्य गठन के समय सरकारी काॅलेजों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या लगभग 83 हजार थी, जो आज बढ़कर एक लाख 85 हजार हो गई है। अब सरकारी तथा गैर सरकारी काॅलेजों को मिलाकर विद्यार्थियों की संख्या दो लाख 75 हजार तक पहुंच गई है।
उच्च शिक्षा में सुविधाओं के साथ गुणवत्ता पर जोर
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती है। इस पर भी सरकार ने गंभीरता से ध्यान दिया है। इसके लिए पंचमुखी कार्यक्रम शुरू किया गया है। काॅलेजों में अधोसंरचना विकास के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत 54 काॅलेजों को दो-दो करोड़ रूपए दिए गए हैं। काॅलेज भवनों में पहली बार कक्षाओं का आकार बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अब 520 वर्गफुट के स्थान पर 900 वर्गफुट के कमरे होंगे। उसी आधार पर नये भवन स्वीकृत किए जा रहे हैं।
तकनीकी शिक्षा सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार
तकनीकी शिक्षा विभाग का उल्लेख करते हुए श्री पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश में 14 साल में तकनीकी शिक्षा सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। भिलाई नगर में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.आई.टी) का भी कैम्पस भिलाई में मंजूर हो चुका है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने एक हजार करोड़ रूपए से ज्यादा राशि का आवंटन भी आई.आई.टी. के निदेशक को जारी कर दिया है। नया रायपुर में ट्रिपल आईटी की स्थापना भी राज्य की एक बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश में इंजीनियरिंग काॅलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 47 और उनमें प्रवेश क्षमता तीन हजार 485 से बढ़कर 19 हजार 297 हो गई।
अब राज्य के सभी जिलों में शासकीय पालीटेक्निक
श्री पाण्डेय ने बताया कि मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। अब छत्तीसगढ़ के सभी 27 जिलों में शासकीय पाॅलीटेक्निक संस्थान खुल चुके हैं। महिलाओं के लिए चार पाॅलीटेक्निक खोले गए हैं। इन सबको मिलाकर राज्य में कुल 32 सरकारी और 28 प्राइवेट पाॅलीटेक्निक चल रहे हैं। महिलाओं को तकनीकी शिक्षा में प्रोत्साहन देने के लिए सरकारी इंजीनियरिंग काॅलेजों और सरकारी पाॅलीटेक्निक संस्थाओं में स्नातक और डिप्लोमा स्तर के पाठ्यक्रमों में उनको वर्ष 2014-15 से शिक्षण शुल्क से मुक्त कर दिया गया है। इसी तरह शासकीय काॅलेजों में भी स्नातक स्तर तक बालिकाओं को शिक्षण शुल्क से मुक्त रखा गया है।
छत्तीसगढ़ देश का पहला और दुनिया का दूसरा राज्य जिसने
युवाओं को दिया कौशल प्रशिक्षण का कानूनी अधिकार
श्री पाण्डेय ने बताया कि छत्तीसगढ़ भारत का पहला और दुनिया का दूसरा राज्य है, जिसने वर्ष 2013 में विधानसभा में कानून बनाकर अपने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दृष्टि से कौशल विकास का कानूनी अधिकार दिया है। इस कानून में यह प्रावधान है कि 14 वर्ष से 45 वर्ष तक के युवाओं द्वारा अपने मनपसंद व्यवसाय का प्रशिक्षण पाने के लिए कलेक्टर को आवेदन करने पर उन्हें 90 दिनों के भीतर प्रशिक्षण की सुविधा दिलायी जाती है। कौशल प्रशिक्षण देने के लिए 109 सेक्टरों में कम से कम 50 घंटे और अधिकतम 1800 घंटे के 804 विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रम उपलब्ध है।
अब तक 3.19 लाख से ज्यादा युवा हुए कौशल प्रशिक्षित
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत अब तक तीन लाख 19 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में एक लाख 08 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण मिला है। अब तक प्रशिक्षित हो चुके युवाओं में से लगभग एक लाख 15 हजार युवाओं को रोजगार अथवा स्व-रोजगार मिल चुका है। कौशल प्रशिक्षण के लिए राज्य में दो हजार 683 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (व्ही.टी.पी.) पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 1418 सरकारी और 1265 गैर सरकारी संस्थाएं शामिल हैं। प्रशिक्षण के बाद मूल्यांकन के लिए 69 संस्थाओं को तृतीय पक्ष के रूप में मूल्यांकन एजेंसी के तौर पर अधिकृत किया गया है। इन संस्थाओं में 1540 मूल्यांकनकर्ता सूचीबद्ध हैं। निर्माण उद्योग, खेती, इलेक्ट्रिकल, आटोमोबाइल, उद्यानिकी, वन और पशुपालन जैसे विषयों में भी कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। यहां तक कि प्रदेश के जेलों में भी बंदियों को कौशल प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। वर्तमान में विभिन्न जेलों में 4080 बंदी कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
लाइवलीहुड काॅलेजों में 42 हजार से ज्यादा युवाओं को मिला प्रशिक्षण
श्री पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश के सभी 27 जिलों में लाइवलीहुड काॅलेज भी खोले गए हैं। इनमें 42 हजार से ज्यादा युवाओं को छोटे-छोटे लेकिन मानव जीवन के लिए बहुत उपयोगी व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लाइवलीहुड काॅलेजों में प्रशिक्षत युवाओं में से लगभग 17 हजार युवाओं को रोजगार अथवा स्वरोजगार प्राप्त हो चुका है। श्री पाण्डेय ने बताया कि अब तक 24 जिलों के लाइवलीहुड काॅलेजों के भवन निर्माण के लिए 90 करोड़ 20 लाख रूपए की धनराशि मंजूर की जा चुकी है। इन काॅलेजों में छात्रावास भवन भी बनवाए जा रहे हैं। इसके लिए वर्ष 2016-17 में 17 करोड़ 74 लाख रूपए मंजूर किए गए और चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में 38 करोड़ 36 लाख रूपए प्रस्तावित है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए श्री पाण्डेय ने बताया कि राजधानी रायपुर में साइंस पार्क की स्थापना की गई है। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा राज्य के युवाओं को नये अनुसंधानों के लिए प्रोत्साहित करते हुए आविष्कारों के पेटेंट कराने के लिए उन्हें सहयोग दिया जा रहा है।

क्रमांक -3864/स्वराज्य

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