रायपुर : विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में ग्रामोेद्योग से रोजगार

रायपुर : विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में ग्रामोेद्योग से रोजगार रायपुर, 15 दिसम्बर 2017 - छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों और लघु

रायपुर : मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम : साढ़े तीन माह में 56 ग्रामोद्योग इकाईयों के लिए 18 लाख रूपए का अनुदान
रायपुर : भारत अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेला : ऑनलाईन व सोशल मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ के उद्यमी कर रहे हैं अपनें उत्पादों का विक्रय

रायपुर : विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में ग्रामोेद्योग से रोजगार

रायपुर, 15 दिसम्बर 2017 – छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों और लघु व्यवसायों के जरिए साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोग जीवन-यापन कर रहें है। इनमें हाथकरघा बुनकर, गणवेश सिलाई में संलग्न महिलाएं, कोसा उत्पादक किसान, कुम्हार और हस्तशिल्पी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के ग्रामोद्योग विभाग द्वारा बुनकरों की आर्थिक स्थिति सुधारने और उन्हें लगातार रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अनेक योजनाएं चलायी जा रही है। इसके तहत प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन, सहायता अनुदान, कम ब्याज दर पर ऋण, धागा आपूर्ति, कपड़ा रंगाई के लिए कर्मशाला अनुदान और बेहतर पारिश्रमिक दिया जा रहा है। राज्य में 230 हाथकरघा बुनकर सहकारी समितियां है, इनमें 51 हजार से ज्यादा बुनकरों द्वारा विभिन्न तरह के कपड़े तैयार किये जा रहे हैं। बुनकरों द्वारा तैयार कपड़ों को शासकीय वस्त्र आपूर्ति योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा खरीदा जाता है। इसके अलावा बुनकरों द्वारा विभिन्न अवसरों पर आयोजित हाथकरघा वस्त्र प्रदर्शनियों में विक्रय किया जाता है। बुनकरों द्वारा स्कूली बच्चों के लिए गणवेश कपड़े भी तैयार किए जाते है, जिन्हें महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं से सिलवाकर स्कूल शिक्षा विभाग में आपूर्ति किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 660 महिला स्वसहायता समूहों की लगभग छह हजार महिलाओं द्वारा 47 लाख गणवेश सेट तैयार किया गया। इसके लिए उन्हें 16 करोड़ 33 लाख रूपये का सिलाई पारिश्रमिक दिया गया।
ग्रामोद्योग विभाग से सम्बद्ध विभिन्न घटकों-हाथकरघा, रेशम, हस्तशिल्प, माटीकला और खादी-ग्रामोद्योग बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखण्ड में आमगांव में चार करोड़ पांच लाख रूपए की लागत से कंबल प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की गई है। इससे कंबल बुनकरों को रोजगार मिल रहा है। बुनकरों द्वारा ढ़ाई लाख नग कंबल प्रोसेस कर विभिन्न विभागों में आपूर्ति की गई है। इसके पहले प्रोसेसिंग के लिए पानीपथ (हरियाणा) भेजना पड़ता था। भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हाथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत राज्य के नौ विकासखण्डों-डभरा, बम्हनीडीह, नवागढ़ एवं बलौदा जिला जांजगीर-चांपा, छुरिया जिला राजनांदगांव, बालोद जिला बालोद, करतला जिला कोरबा, कुरूद जिला धमतरी और बिलाईगढ़ जिला बलौदाबाजार में हाथकरघा कलस्टर संचालित है। इन कलस्टर के जरिए उत्कृष्ट डिजाइनरों द्वारा एक हजार 620 बुनकरों को बुनाई, रंगाई और डिजाईन का प्रषिक्षण दिया जा रहा है। बुनाई कला को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल सर्वश्रेष्ठ दो बुनकरों को एक-एक लाख रूपए का बिसाहूदास महंत पुरस्कार और दो बुनकारों को दीनदयाल हाथकरघा पुरस्कार दिया जाता है। इसी तरह हर साल सर्वश्रेष्ठ आठ हस्तशिल्पयों को पच्चीस हजार रूपए के मान से पुरस्कार दिया जाता है। इसके अलावा बुनकरों के प्रतिभावन बच्चों को शिक्षा प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाता है। पिछले पांच साल में तीन हजार 383 बच्चों को पुरस्कृत किया जा चुका है।
राज्य में टसर कोसा और शहतूती रेशम उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। टसर रेशम विकास एवं विस्तार योजना के तहत कोसा उत्पादन के लिए तेरह हजार 779 हेक्टेयर क्षेत्र में विभागीय परियोजना के साथ ही प्राकृतिक वन खण्डों का उपयोग किया जा रहा है। रेशम विभाग की विभिन्न योजनाओं से लगभग अस्सी हजार लोग लाभान्वित हो रहे हैं। हस्तशिल्पियों के विकास के लिए उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राज्य में हस्तषिल्प रोजगार में संलग्न षिल्पकारों की संख्या लगभग पन्द्रह हजार है। हस्तशिल्प के विभिन्न विधाओं- बेलमेटल, लौह, बांस, काष्ठ, पत्थर, कौड़ी, शिशल, मृदा, कसीदाकारी, गोदना, भित्ती चित्र, कालीन आदि शिल्पों में राज्य के नौ हजार 747 शिल्पियों को बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण दिया जा चुका है। हस्तशिल्पियों को उनके उत्पादों की बिक्री के लिए राजधानी रायपुर के माना विमानतल परिसर, पुरखौती मुक्तांगन, छत्तीसगढ़ हाट परिसर पंडरी और शापिंग काम्पलेक्स आमापारा में शबरी एम्पोरियम खोला गया है। इसके अलावा भिलाई, राजनांदगांव, चम्पारण, जगदलपुर, परचनपाल, नारायणपुर, जशपुर, अम्बिकापुर, कोण्डागांव, कांकेर, मैनपाट और कनाट पैलेस नई दिल्ली एवं अहमदाबाद में शबरी एम्पोरियम संचालित किया जा रहा है।
प्रदेश के कुम्हारों और माटीशिल्पियों के आर्थिक एवं तकनीकी विकास के लिए छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड का गठन किया गया है। बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत माटी शिल्पियों को प्रशिक्षण और रोजगार दिया जा रहा है। महासमुन्द जिले के गढ़फुलझर में राज्य की प्रथम सिरेमिक ग्लेजिंग यूनिट शुरू किया गया है। इससे चार सौ माटी शिल्प परिवारों को रोजगार मिल रहा है। कुम्हार टेराकोटा योजना के तहत माटी शिल्पियों को तीन हजार 745 नग उन्नत तकनीकी के विद्युत चाक और 505 नग बेरिंग चाक का निःशुल्क वितरण किया गया है। छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा इस वर्ष 15 अगस्त को मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के कम पढ़े-लिखे युवाओं को ग्रामोद्योग स्थापना के लिए आकर्षक अनुदान पर बैंकों से ऋण दिलाया जा रहा है। पिछले तीन माह में 56 इकाईयों के लिए 18 लाख रूपए का अनुदान दिया गया है। इससे 336 लोगों को लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम राज्य सरकार की एक बड़ी महत्वपूर्ण योजना है। इसमें स्व-रोजगार के लिए पांचवीं कक्षा तक शिक्षित युवक-युवतियों को अधिकतम एक लाख रूपए और आठवीं कक्षा तक शिक्षित युवक-युवतियों को अधिकतम तीन लाख रूपए का ऋण ग्रामोद्योग शुरू करने के लिए दिया जा रहा है। ग्रामोद्योग विभाग से सम्बद्ध सभी घटकों-हाथकरघा, रेशम, हस्तशिल्प, माटीकला और ग्रामोद्योग बोर्ड के हितग्राहियों के समग्र विकास के लिए पंचवर्षीय ग्रामोद्योग नीति (2016-2021) तैयार की गई है। नीति के तहत ग्रामोद्योग से जुड़े सभी व्यवसायों के माध्यम से राज्य में सात लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है। क्रमांक-3993

COMMENTS

WORDPRESS: 0
DISQUS: 0