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धूम्रपान समय से पहले ले जाता है मौत के दरवाजे पर - सुनीता केशरवानी


धूम्रपान एक ऐसी बुरार्इ है, जो व्यकित को समय से पहले ही मृत्यु के द्वार तक ले जाती है। ध्रूमपान के जरिए लोग तम्बाकू जैसे जहरीले पदार्थ का सेवन करते हैं। तम्बाकू सेवन केवल शरीर के लिए ही हानिकारक नहीं है, बलिक यह व्यकित की सामाजिक-आर्थिक सिथति को भी कमजोर बनाती है। कर्इ बार इसकी वजह से लोगों का घर-परिवार ही तबाह हो जाता है। तम्बाकू के सेवन से मुख कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होती है। इससे फेफड़े और गुर्दे की भी गंभीर बीमारियां होती है। इसके अलावा तम्बाकू सेवन से अस्थमा, श्वास की नली में अवरोध, तपेदिक और निमोनिया भी होता है। एक अनुमान के अनुसार विश्व स्तर पर हर वर्ष लगभग 40 लाख लोग तम्बाकू से मरते हैं, जबकि भारत में आठ लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो जाती है। इसलिए तम्बाकू सेवन करने वाले हर व्यकित को जल्द से जल्द इस बुरार्इ से छुटकारा पा लेना चाहिए।
तम्बाकू में निकोटिन नामक जहरीला रसायन होता है। जो शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करता है। निकोटिन थोड़ी मात्रा में लेने से यह शरीर में उत्तेजना पैदा करती है, थोड़ी और ज्यादा मात्रा में लेने से शरीर में शिथिलता पैदा करती है और बहुत ज्यादा मात्रा में लेने से मृत्यु के द्वार तक भी पहुंचा सकती है। बीड़ी-सिगरेट में कार्बनमोनो आक्साइड नामक विषैली गैस होती है, जो फेफड़ों को विकृत करती है। तम्बाखू में दूसरा जहरीला पदार्थ कोलतार होता है, जिससे कैंसर होने की संभावना हो सकती है। पांच सिगरेट पीने पर एक व्यकित की आयु पांच मिनट कम हो जाती है। जो लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं, उनमें दो में से एक की मृत्यु तम्बाकू से होने वाले रोगों के कारण होती है। तम्बाकू एक खतरनाक जहर है। इसके धूएं में चार हजार से अधिक जहरीले तत्व होते हंै, जिसमें कैंसर निर्माण करने वाले 48 प्रकार के तत्व होते है। विश्व में हर वर्ष लगभग 40 लाख लोग तम्बाकू के सेवन से होने वाले रोगों से मरते हैं। तम्बाकू युक्त गुटका खाने से मुख में और बीड़ी-सिगरेट से फेफड़ों में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।
तम्बाकू का पान मसाला, किमाम, खैनी, गुटका, बीड़ी-सिगरेट और छिकनी किसी भी रूप में सेवन करना शरीर के लिए हानिकारक है। इससे शरीर में अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। तम्बाकू के सेवन से कोरोनरी आर्टरी रोग होता है। इस रोग में हृदय को रक्त बहुत कम मात्रा में पहुंचता है। इसी प्रकार फेफड़ों में वायु का आदान-प्रदान करने वाली नलियों के नष्ट होने से क्रोनिक ब्रान्कायटिस एण्ड एम्फीजिमा रोग हो जाता है। तम्बाकू से फेफड़ों के अलावा मुख, गला, अन्न नलिका और मूत्राशय का कैंसर होने की संभावना होती है। इसके अलावा साइनो साइटिस, पेपिटक, अल्सर, बर्गर बीमारी (पैरों की जख्म जल्द ठीक नहीं होती), धूल से एलर्जी, एलर्जिक दमा आदि रोग भी होते हैं। धूम्रपान करने वाले लोग खुद के साथ दूसरों को भी नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि धूम्रपान करने वाले धुआं युक्त वायु वातावरण में छोड़ देते हैं और उस वायु को धूम्रपान नहीं करने वाले लोग ग्रहण कर रोगग्रस्त हो जाते हैं। इस सिथति को पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है।
धूम्रपान छोड़ने के एक वर्ष बाद धमनी के हृदय रोग का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है और इसका लाभ जारी रहता है। फेफड़े के कैंसर, पुराने अवरोधक, फेफड़े के रोगों और आघात का खतरा अपेक्षाकृत घट जाता है। धूम्रपान बंद करने से 10 से 14 वर्ष के बाद कैंसर से मृत्यु का खतरा काफी कम हो जाता है। धूम्रपान और तम्बाकू से मुकित के लिए सबसे पहले दृढ निश्चय जरूरी है। कर्इ बार तम्बाकू का सेवन बंद करने से शुरू में सिर दर्द, बेचैनी, चिंता, भय, थकान, घबराहट, उल्टी, चक्कर आना जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बलिक धैर्य बनाए रखना चाहिए। डाक्टरों की मदद से इन समस्याओं से आसानी से निजात मिल सकती है।
लोगों को धूम्रपान और तम्बाकू के दुष्परिणामों से बचाने के लिए सिगरेट और तम्बाकू उत्पाद ( विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 बनाया गया, जिसके तहत 'तम्बाकू नियंत्रण कानून 2 अक्टूबर 2008 से पूरे देश में लागू कर दिया गया है। इस कानून के तहत सभी सार्वजनिक स्थानों जैसे स्कूल, अस्पताल, होटल, सार्वजनिक कार्यालय, न्यायालय भवन, बस स्टाप, रेलवे स्टेशन, सिनेमा हाल, पुस्तकालय, शापिंग माल आदि में धूम्रपान पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तम्बाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है। शैक्षणिक संस्थानों के सौ गज की परिधि में तम्बाकू उत्पादों का विक्रय भी प्रतिबंधित किया गया है। यदि कोर्इ व्यकित सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करते हुए पाया जाता है, तो उस पर 200 रूपए तक अर्थदंड का भी प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार द्वारा भी प्रदेश में नशा मुकित के लिए समाज कल्याण विभाग के माध्यम से ग्राम स्तर तक समय-समय पर अनेक कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से धूम्रपान सहित मादक द्रव्य और नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों के प्रति लोगों में जागरूकता विकसित की जाती है। राज्य भर में नशामुकित रैली, नुक्कड़ नाटक, गीत-नृत्य, प्रदर्शनी, प्रतियोगिताएं, प्रश्न मंच आदि के माध्यम से नशे के विरूद्ध व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है। राज्य में रायपुर और बिलासपुर जिले में दो नशा मुकित केन्द्र भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां पीडि़त व्यकितयों में नशे की आदत को छुड़ाने के लिए परामर्श एवं उपचार की व्यवस्था रहती हैं। धूम्रपान सहित किसी भी प्रकार का नशा करना बहुत बुरी आदत है। इस आदत से लोगों को मुकित दिलाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना चाहिए। नशे के दुष्परिणामों से हर किसी को जागरूक करना होगा, नशा के विरूद्ध पूरे समाज में वातावरण बनाना होगा, तभी खुशहाल जीवन, खुशहाल परिवार और समाज की स्थापना संभव है।

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