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हमारी ३ जी से पहले आ गई उनकी ४ जी


टाटा डोकोमो ने पिछली चार नवंबर की आधी रात से नौ टेलीकॉम सर्कलों में ३ जी मोबाइल ब्राडबैंड सेवाएं शुरू कर दी हैं। भारती एअरटेल ने ऐलान किया है कि वह भी दिसंबर तक तीसरी पीढ़ी की दूरसंचार सेवा लांच कर देगी। वोडाफोन और आईडिया शायद अगले साल के शुरू में इसे शुरू करें। बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसी सरकारी टेलीकॉम कंपनियों को छोड दें तो भारत में ३जी का सिलसिला निराशाजनक रूप से कुछ ज्यादा ही देरी से शुरू हुआ है। यह देरी और भी चुभने लगती है जब यह पता चलता है कि उधर विकसित देशों में ४ जी तकनीक की शुरूआत हो चुकी है।
जी हां, इससे पहले कि हम मोबाइल ब्रॉडबैंड के क्षेत्र में अपनी नवीनतम तकनीक से हाथ मिलाएं, पश्चिमी दुनिया ने इसे अलविदा कहना भी शुरू कर दिया है। अमेरिका की जानी मानी दूरसंचार कंपनी स्प्रिन्ट ने न्यूयॉर्क, टैम्पा, न्यू हैवन और हार्टफोर्ड में ४ जी सेवा शुरू कर दी है। मेट्रो पीसीएस ने डेट्रोयट में इसकी शुरूआत की है तो टी-मोबाइल इसी महीने अमेरिका का सबसे बड ४जी नेटवर्क शुरू करने जा रही है। पश्चिम ही क्यों, हमारे पडस में भी ४ जी की हलचल शुरू हो गई है। इंडोनेशिया, सिंगापुर और फिलीपींस में इसे लांच करने की तैयारी चल ही रही है, मलेशिया सरकार ने ४जी नीलामी के लिए नौ ब्लॉक तय कर लिए हैं। उधर चीन चुपचाप ४जी के लिए काम आने वाले मोबाइल फोन और दूसरे दूरसंचार उपकरण बनाने में जुटा है।
मगर हम हिंदुस्तानी फिलहाल २जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में हुए गड़बड घोटाले के विवादों और ३ जी लांच में देरी की समस्या से ही नहीं उबर सके हैं। थ्री जी ने मोबाइल फोन पर वीडियो फोन, लाइव टेलीविजन और फास्ट डेटा डाउनलोड का रास्ता साफ कर दिया था। दूसरी पीढ ी (२ जी) सेवाओं के तहत जहां १ मेगाबाइट डेटा डाउनलोड में करीब एक मिनट का समय लगता था, वहीं ३ जी ने इसे घटाकर महज चार-पांच सैकंड कर दिया है। लेकिन इससे पहले कि पहली बार सन २००१ में सामने आई इस तकनीक को नौ साल बाद अपनाकर भारतीय उपभोक्ता अपने मोबाइलों, कंप्यूटरों और डेटा कार्डों पर सनसनाते डेटा ट्रांसफर का आनंद ले पाएं, देश में यह बहस शुरू हो गई है कि क्या हमें ३ जी की बजाए सीधे ४ जी की शुरूआत नहीं कर देनी चाहिए? पहले तो दूरसंचार विभाग ने ३ जी की नीलामी में ही इतनी देरी कर दी फिर स्पेक्ट्रम पाने वाली कंपनियां तेजी दिखाने में नाकाम रहीं। बीच में पिस गया बेचारा उपभोक्ता, जो अब 'इसे लूं या ४ जी का इंतजार करूं' की उधेड बुन में फंसने वाला है।
क्या है ४ जी - २ जी, ३ जी और ४ जी तीनों ही सेल्युलर वायरलेस तकनीकें हैं। इनमें सबसे बड ा अंतर डेटा के डाउनलोड होने की स्पीड का है। जहां २जी में डेटा ट्रांसफर की अधिकतम गति महज ६४ किलोबिट प्रति सैकंड (केबीपीएस) थी, वहीं ३ जी ने इसे बढ ाकर १४ मेगाबिट प्रति सैकंड (एमबीपीएस) तक पहुंचा दिया। तेज गति से डेटा का ट्रांसफर होने के कारण ही मोबाइल फोन पर टीवी और वीडियोज का प्रसारण संभव हो सका। बहरहाल, ४ जी तकनीक डेटा ट्रांसफर की गति को मेगाबिट से सीधे गीगाबिट (एक हजार गुना) के दौर में ले जाएगी। जहां सचल मोबाइल सेटों पर यह कम से कम सौ मेगाबिट प्रति सैकंड की गति देगी, वहीं स्थिर अवस्था में रहने पर दूरसंचार उपकरणों में एक गीगाबिट प्रति सैकंड (जीबीपीएस) तक डेटा ट्रांसफर हासिल किया जा सकेगा। क्या आप यकीन करेंगे कि लगभग ढाई सौ एमबी की फाइल इसके जरिए एक सैकंड में यहां से वहां पहुंच जाएगी! क्या यह डेटा ट्रांसफर लगभग उतना ही तेज नहीं है जैसा कि आप अपने दफ्तर के कंप्यूटर नेटवर्क में देखते हैं? टाटा की सहयोगी जापानी कंपनी एनटीटी डोकोमो तो पांच गीगाबाइट प्रति सैकंड तक डेटा ट्रांसफर का प्रयोग कर चुकी है।
४ जी तकनीक लागू होने से वास्तविक अर्थों में मोबाइल फोन पर ग्लोबल रोमिंग शुरू हो जाएगी। यह आईपी आधारित व्यवस्था है जो सुपर हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी तो सुनिश्चित करेगी ही, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद लोगों के बीच हाई रिजोल्यूशन वीडियो कॉन्फरेंसिंग, टेलीविजन जैसी ही सफाई के साथ टीवी कार्यक्रमों का मोबाइल पर प्रसारण, सुपरफास्ट मल्टी यूजर गेमिंग, मल्टीमीडिया अखबारों का 'प्रसारण' और मल्टीमीडिया आधारित मोबाइल कामर्स भी आसान बना देगी। हर समय, हर स्थान पर इंटरनेट कनेक्टिविटी का सपना इससे पूरा होगा, जो आईपी प्रोटोकॉल के तहत इस्तेमाल होने वाली पैकेट स्विचिंग प्रणाली से संभव होगा। दुनिया में कहीं भी मौजूद दो लोगों के बीच सौ एमबीपीएस गति से डेटा का आदान-प्रदान दूरसंचार और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में नई क्रांति लाने वाला है। अगर आज भी दुनिया में दूरियां बची हुई हैं तो उन्हें विदा करने की तैयारी कर लीजिए।
उपभोक्ताओं के लिए अच्छी बात यह है कि ४ जी युक्त मोबाइल फोन या अन्य संचार यंत्र नहीं होने पर भी, वे ४ जी कनेक्शन लेने के बाद भी अपने पारंपरिक फोन का पहले की ही तरह इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्हें २ जी या ३ जी सेवाएं निर्बाध रूप से मिलती रहेंगी। कई ४ जी स्मार्टफोन वायरलैस हॉटस्पॉट के रूप में भी काम कर सकेंगे, यानी आपके पास ऐसा फोन है तो दफ्तर के लिए इंटरनेट कनेक्शन लेने की बाध्यता नहीं है। एचटीसी इवो स्मार्टफोन को ही देखिए जो आठ अलग-अलग कंप्यूटरों, मोबाइल फोनों आदि को वायरलैस तकनीक के जरिए इंटरनेट से कनेक्ट कर सकता है।
आने लगे ४ जी स्मार्ट फोन - ४ जी की आहट शुरू होने के साथ ही मोबाइल उपकरण, डेटा कार्ड आदि बनाने वाली कंपनियों ने इसके अनुरूप उत्पाद लांच करने शुरू कर दिए हैं। एपल का आईफोन ४जी पहले ही बाजार में आ चुका है। वोडाफोन ने इसे भारत में भी लांच कर दिया है। इसमें एपल का मशहूर म्यूज़िक प्लेयर आईपोड भी समाहित है और वीडियो कॉलिंग का फीचर बहुत सरलता से इस्तेमाल किया जा सकता है। उधर स्मार्टफोनों के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी एचटीसी ने इवो नामक ४ जी युक्त फोन जारी किया है। तेज रफ्तार डेटा ट्रांसफर के कारण 'सुपरसोनिक' के नाम से मशहूर इस फोन में गूगल का एंड्रोइड आपरेटिंग सिस्टम मौजूद है और स्क्रीन का साइज है- ४.३ इंच। दूरसंचार कंपनी स्प्रिंट इसे अमेरिकी बाजार में प्रमोट कर रही है।
इस दौड़ में सैमसंग भी पीछे नहीं है जिसने अपना पहला ४जी मोबाइल फोन 'सैमसंग एपिक' के नाम से जारी किया है। एचटीसी इवो के मुकाबले यह थोड ा हल्का पडता है। इसकी स्क्रीन का साइज चार इंच, कैमरे का स्पेसीफिकेशन मेगापिक्सल और वायरलैस हॉटस्पाट क्षमता पांच वाई-फाई युक्त डिजिटल डिवाइसेज को इंटरनेट से कनेक्ट करने की है। इसमें मौजूद 'आल-शेयर' सुविधा का इस्तेमाल कर यूजर दूसरे स्मार्टफोन उपभोक्ताओं के साथ संगीत, वीडियो आदि का आसानी से आदान-प्रदान कर सकते हैं। अमरिकी कंपनी टी-मोबाइल ने जिस माई-टच नामक ४जी युक्त स्मार्टफोन को अपनाया है, उसे एचटीसी ने विकसित किया है। इसमें हाई-डेफीनेशन (एचडी) वीडियो कैमरा मौजूद है और साथ ही मौजूद है वीडियो चैट की सुविधा। चाहें तो हाई-डेफीनेशन वीडियो क्वालिटी में बने गेम्स का आनंद भी लिया जा सकता है। एंड्रोइड आपरेटिंग सिस्टम से युक्त इस माई-टच में ३.८ इंच चौड ी स्क्रीन मौजूद है।

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