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इसलिए गायब हैं यूपी से क्षत्रप!


नई दिल्ली (साई)। उत्तर प्रदेश चुनावों के परिणामों की घोषणा के बाद से सूबाई राजनीति में तरह तरह के दावे करने वाले क्षत्रप अब परिदृष्य से इस तरह गायब हो चुके हैं मानो गधे के सिर से सींग। इस बारे में सियासी बियावान में खोजबीन आरंभ हो गई है कि आखिर क्या कारण है कि सूबे के नेता उत्तर प्रदेश की ओर रूख नहीं कर पा रहे हैं।
खुर्दबीनी पर इसका एक कारण समझ में आ रहा है, और वह यह है कि क्षत्रपों ने अपने अपने गढ़ों में ही अपनी पार्टी की लाज नहीं बचा पाई है। राज्य की राजनीति में सक्रिय डेढ़ दर्जन से अधिक नेताओं ने अपने अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में ही अस्मत गंवा दी है। अब नेताओं को भय है कि अगर वे सूबे में जाते हैं तो जनता उनसे यह सवाल अवश्य ही पूछेगी कि सारे भारत में अपना जादू चलने का दावा करने वाले नेता आखिर घर में ही अलोकप्रिय कैसे हो गए।
कहा जाता है कि अगर किसी नेता की औकात पता करना है तो उसे विधानसभा या लोकसभा का नहीं वरन् पार्षद का चुनाव लड़वाना चाहिए। पार्षद का चुनाव क्षेत्र बेहद छोटा सा होता है और इसमें उस नेता की सच्ची लोकप्रियता का आंकलन किया जा सकता है। मीडिया में पैसे के दम पर अपना महिमा मण्डन करवाकर तो हर कोई मीर बन सकता है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेसियों की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के पांच विधानसभ ा क्षेत्रों में से एक भी जिताने में सफल नहीं हो सकीं। वहीं युवराज राहुल गांधी ने अमेठी संसदीय क्षेत्र में पांच में से महज दो ही विधानसभा में परचम लहराया है।
कांग्रेस के अन्य क्षत्रपों में केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा गोंडा, सलमान खुर्शीद फर्रूखाबाद, जतिन प्रसाद धौरहरा, मोहम्मद अजहरूद्दीन मुरादाबाद तो राज बब्बर फिरोजाबाद में पांच में एक भी सीट नहीं जिता पाए। केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायस्वाल कानपुर में पांच में से एक ही सीट जिताने में सफल हो पाए हैं। कांग्रेस के आर.पी.एन.सिंह पांच में से कुशीनगर की दो सीट जिताने में सफल हो पाए हैं।
भाजपा के क्षत्रपों में योगी आदित्य नाथ गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में पांच में से दो, वरूण गांधी पीलीभीत संसदीय क्षेत्र में पांच में से एक, राजनाथ सिंह गाजियाबाद में पांच में से एक भी सीट नहीं जिता पाए। इसी तरह आंवल संसदीय क्षेत्र में मेनका गांधी पांच में से महज एक ही उम्मीदवार को जिता पाईं हैं।
अन्य दलों में राष्ट्रीय लोक मंच की जया प्रदा के खाते में रामपुर की पांच में से एक भी सीट नहीं गई है। केंद्रीय मंत्री और रालोद के अजीत सिंह बागपत में पांच में से दो ही सीट जिताने में सफल हो पाए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे अब जन क्रांति पार्टी के सुप्रीमो कल्याण सिंह का हाल बेहद खराब रहा वे एटा में पांच में से एक भी सीट पर परचम नहीं लहरा पाए हैं। यही कारण है कि नेताओं ने चुनाव के बाद मौन ही साध लिया है।

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