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कम्प्यूटर छेड़ने वाले सावधान!!


किसी के कम्प्यूटर को खोलना और उसमें ताक - झांक करना आपको महंगा पड़ सकता है। आप और हम किसी का कम्प्यूटर खोलते हैं तो शायद ही कानून की सोचते हैं , लेकिन आपको मालूम होना चाहिए कि बिना अनुमति किसी का कम्प्यूटर खोलना या उससे जानकारियां चुराना बहुत बड़ा अपराध है।

आईटी (इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी) ऐक्ट के अनुसार कोई व्यक्ति अगर बिना अनुमति किसी के कम्प्यूटर , कम्प्यूटर सिस्टम , कम्प्यूटर नेटवर्क तक पहुंच बनाता है , आंकड़े कॉपी , डाउनलोड या छांट कर निकालता है चाहे वह हटाने योग्य स्टोरेज मीडियम में ही क्यों न हो , प्रभावित व्यक्ति को उसे हर्जाना देने के लिए उत्तरदायी होना होगा। इसी तरह सेक्शन 43 में ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी के कम्प्यूटर , कम्प्यूटर सिस्टम या नेटवर्क या डेटाबेस में वायरस डालता है , उसे क्षति पहुंचाता है या बाधा पहुंचाता है , तो उससे जुर्माना वसूला जा सकता है।

किसी व्यक्ति को अवैध तरीके से कम्प्यूटर तक पहुंच बनाने में , आंकड़े चुराने में , कम्प्यूटर को क्षति पहुंचाने या कम्प्यूटर सोर्स कोड को बदलने में सहयोग करने वाले भी इस ऐक्ट के तहत दोषी माने जाएंगे। किसीव्यक्ति को उसके कम्प्यूटर तक पहुंच बनाने में बाधा डालना भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

हैकिंग का खौफ नहीं था - वर्ष 2000 में आईटी ऐक्ट वस्तुत : ई-कॉमर्स, इलेक्ट्रॉनिक रूप से पैसों से लेनदेन और ई- गवरनेंस को ध्यान में रख कर लाया गया था। इसलिए, तब कम्प्यूटर सोर्स कोड यानी प्रोग्राम लिस्टिंग, कमांड और प्रोग्राम विश्लेषण वगैरह की चोरी, इनमें बदलाव या इन्हें बर्बाद करने जैसी बातों पर ज्यादा फोकस किया गया था। तब हैकिंग का आज की तरह खौफ नहीं था। ऐक्ट का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होने वाले ट्रांजेक्शन को कानूनी मान्यता देना था। ऐक्ट के सेक्शन 65 में उपरोक्त प्रकार के अपराध के लिए तीन साल की सजा या दो लाख रुपए का जुर्माना या जुर्माने के साथ सजा का प्रावधान किया गया है।

अश्लील मेसेज की सजा अश्लील मेसेज का आदान - प्रदान करने से पहले भी सोचने और सावधान होने की जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति कम्प्यूटर या संचार उपकरण के माध्यम से ऐसा संदेश भेजता है जो अश्लील , गलत या डर पैदा करने वाला हो और जिसके भेजने का उद्देश्य किसी को असुविधा पहुंचाना , गुस्सा दिलाना , अपमान करना , बाधा पहुंचाना , चोट पहुंचाना , खतरा पैदा करना , दुश्मनी निकालना या बुरा चाहना हो , ऐसे मैसेज केलिए जुर्माने के साथ तीन साल की सजा हो सकती है। साथ ही , किसी इलेक्ट्रॉनिक मेल या इलेक्ट्रॉनिक मेल संदेश के जरिए संदेश पाने वाले संदेश के आने वाले जगह को लेकर भ्रमित करना भी इसी श्रेणी का अपराध है।

चोरी के कम्प्यूटर - अगर कोई व्यक्ति बेईमानी की नीयत से कोई ऐसा कम्प्यूटर रिसोर्स या कम्प्यूटर डिवाइस रखता या प्राप्त करता है , जिसके बारे में उसे लगता है कि वह चुराया गया है, तो उसे तीन साल से ज्यादा की सजा या एक लाख रुपए बतौर जुर्माना या फिर दोनों भुगतना पड़ सकता है। इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर, पास वर्ड या अन्य आईडेंटिफिकेशन की चोरी करने वालों के लिए भी सेक्शन 66 (सी) के तहत इतनी ही सजा का प्रावधान है।

पुलिस को अधिकार - पुलिस किसी भी पब्लिक प्लेस पर छानबीन कर सकती है और किसी व्यक्ति को बिना वॉरंट अरेस्ट कर सकती है, जहां यह लगे कि आईटी ऐक्ट के तहत अपराध हो रहा है या किया जाने वाला है। सर्च और अरेस्ट करने का अधिकार इस ऐक्ट के तहत इंस्पेक्टर या ऐसे अधिकारी को दिया गया है , जिसे केन्द्र या राज्य सरकार अधिकृत करती है।

यहां पब्लिक प्लेस से आशय जन सुविधा स्थल , होटल , दुकान या दूसरी जगहें जो लोगों को इस्तेमाल के लिए हों या जहां तक पब्लिक पहुंच बना सकती है।

आईटी (अमेंडमेंट) ऐक्ट 2008 क्यों ?

सरकार ने माना कि वर्ष 2000 में जो ऐक्ट लाया, वह पर्याप्त नहीं था। बहुत सारे पहलू ऐसे रह गए थे, जिन पर फोकस नहीं किया जा सका था। साथ ही समय के साथ आईटी से जुड़े अपराधों की प्रति भी बदली। ऐक्ट की धाराएं दिन - ब - दिन बदले अपराधों के आगे कम पड़ने लगीं। लिहाजा सरकार को करीब दो साल पहले इसमें संशोधन की सोचनी पड़ी। 5 फरवरी, 2009 को सरकार ने संशोधनों को अधिसूचित कर दर्शा दिया कि सरकार साइबर अपराधों के प्रति पूरी तरह जागरूक है।

पहली विशेषता यह रही कि इन संशोधनों से न केवल देश , बल्कि विदेश में हो रहे साइबर अपराधों और विभिन्न देशों की साइबर अपराध नीति और उन पर बने कानूनों का अध्ययन किया गया।

ऐक्ट की विशेषता - आईटी ऐक्ट के संशोधन में 52 धाराएं हैं। खास बात यह है कि सभी प्रकार के सेवा प्रदाताओं को संशोधनों द्वारा ऐक्ट की परिधि में लाया गया है। अब सर्च इंजन, साइबर कैफे, नीलामी साइट से लेकर वेब हॉस्टिंग की सेवा लेने और इंटरनेट वगैरह की सेवा देने वाले तक ऐक्ट से बंध गए हैं।

प्रमुख संशोधन - ऐक्ट के जरिए सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर से जुड़े अपराधों के लिए सेक्शन 3(ए) जोड़ा गया। इसी प्रकार ऐक्ट में डाटा की सुरक्षा और उसकी प्रायवेसी सुनिश्चित करने और इसमें होने वाली चूक के लिए जिम्मेदारी तय करने और उसके लिए हर्जाने की व्यवस्था हेतु नया सेक्शन 43 (ए) लाया गया। इस सेक्शन के तहत सुरक्षा व्यवहार और प्रक्रिया संबंधी जिम्मेदारी दो पार्टियों के बीच हुए करार के आधार पर या जो कानून लागू हो, उसके आधार पर तय होगी। उचित सुरक्षा व्यवहार और प्रक्रिया केन्द्र सरकार पेशेवर संस्थाओं या असोसिएशनों के साथ मिल कर तय कर सकती है।

कानूनी करार को भंग कर सूचना लीक करने को लेकर नया सेक्शन 72(ए) भी शामिल किया गया। इस सेक्शन के तहत सूचना की गोपनीयता भंग करने पर तीन साल तक की सजा या पांच लाख रुपए जुर्माना या दोनों के रूप में दंड का प्रावधान किया गया है।

नग्नता पर रोक - भद्दी चीजों के प्रसारण व प्रकाशन को लेकर भी इस ऐक्ट में संशोधन किया गया है। सेक्स कृत्य का प्रकाशन या प्रसारण करने वाले के लिए सेक्शन 67(ए) में 10 लाख रुपए जुर्माने के साथ पांच साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। अगर कोई व्यक्ति दोबारा इसी तरह के अपराध में लिप्त पाया जाता है तो उसे सात साल तक की सजा हो सकती है।

आईटी ऐक्ट में पहली बार बाल नग्नता को तव्व्जो दी गई और इसे लेकर सेक्शन 67(बी) बनाया गया। इसका उद्देश्य बच्चों को यूज कर नग्नता के प्रसारण - प्रकाशन पर रोक लगाना है।

70 (ए) और 70 (बी) के रूप में भी दो महत्वपूर्ण सेक्शन जोड़े गए हैं। 70 (ए) में नोडल ऐजेंसी की बात कही गई है तो 70 (बी) में साइबर इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम की बात कही गई है। इसके गठन का उद्देश्य साइबर घटनाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करना, उनका विश्लेषण और जानकारियों का प्रसार करना है।

इस ऐजेंसी को काफी सारे अधिकार दिए गए हैं। इनके द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध न कराने वाले व्यक्ति या कॉर्पोरेट बॉडी के प्रबंधकों को एक साल तक की सजा या सजा के साथ एक लाख रूपये का जुर्माना हो सकता हैं।

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