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History Of Chhattisgarh In Hindi | Chhattisgarh ka Itihas Hindi Me

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History Of Chhattisgarh In HIndi

छत्तीसगढ़ राज्य का इतिहास

क्या आप जानते हैं छत्तीसगढ़ राज्य प्राचीन काल से विभिन्न संस्कृतियों का केंद्र रहा है इसका उल्लेख प्राचीन धर्म से लेकर रामायण और महाभारत में भी मिलता है, यह मध्य भारत का विशाल जंगलो वाला राज्य है जो अपने मंदिरों और झरनों के लिए बेहद ही मशहूर है|

इतिहास और भूगोल

छत्तीसगढ़ को प्राचीन काल में कौशल राज्य के नाम से जाना जाता था। यह 36 गढ़ों का समूह था, जिसके कारण इसे छत्तीसगढ़ नाम दिया गया। 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर यह एक स्वतंत्र राज्य बना | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर है। यह राज्य झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से घिरा हुआ है। छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण नदियां बहती हैं, जिनमें महानदी, अरपा, शिवनाथ, हरदेव और खारून प्रमुख हैं।

आबादी और शैक्षिक स्थिति

छत्तीसगढ़ में 33 जिले हैं और इसका क्षेत्रफल 195194 वर्ग किलोमीटर है। यह भारत का दसवां सबसे बड़ा राज्य है। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की आबादी 2 करोड़ 55 लाख 45198 है। राज्य की साक्षरता दर 70.8% है। राज्य में प्रति 1000 पुरुषों पर 991 महिलाएं हैं। राज्य की अधिकांश आबादी हिंदू है, जो कुल आबादी का लगभग 95% है। छत्तीसगढ़ में मुस्लिम, बौद्ध, सिख और अन्य धर्मों के लोग भी रहते हैं। छत्तीसगढ़ विभिन्न जनजातियों और समुदायों का घर है। यहाँ की संस्कृति समृद्ध और विविधतापूर्ण है। यहाँ अनेक लोक नृत्य, लोक संगीत और त्यौहार मनाए जाते हैं।

खनिज धन और अर्थव्यवस्था

छत्तीसगढ़ भारत के खनिज समृद्ध राज्यों में से एक है। यहां पर चुना पत्थर, लोहा अयस्क, तांबा, फास्फेट, मैगज़ीन, बॉक्साइट, कोयला और अभ्रक के उल्लेखनीय भंडार हैं। तांबे की सर्वाधिक मात्रा बिलासपुर जिले से मिलती है।छत्तीसगढ़ में लगभग 5.5 करोड़ टन का समृद्ध मिट्टी भंडार है जो पूरे देश के कुल भंडार का 24% है। यहां अनुमानित 7.3 करोड़ टन का समृद्ध बॉक्साइट भंडार, 200700 करोड़ टन का लौह अयस्क भंडार, 2690 करोड़ टन का कोयला भंडार और 485000 किलो क्षमता का स्वर्ण भंडार है। यहां भारत का सर्वोत्तम लोहा अयस्क मिलता है जिसका 19.7 करोड़ टन का भंडार है। भिलाई में भारत के बड़े इस्पात संयंत्र में से एक स्थित है। राज्य में 75 से भी ज्यादा बड़े और मध्य में इस्पात उद्योग हैं जो गर्म धातु, कच्चा लोहा, भुरभुरा लोहा यानी स्पंज आयरन, रेल पटरी, लोहे और पत्तियों का उत्पादन करते हैं।

राज्य की 80% आबादी कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में लगी है। यहां खेती का प्रमुख मौसम खरीफ है और चावल यहां की मुख्य फसल है। राज्य में धान का भंडार मौजूद है और इसलिए राज्य को “धान का कटोरा” कह कर सम्मानित किया जाता है। यहां प्रति हेक्टेयर 14 क्विंटल धान का उत्पादन होता है। राज्य के अन्य महत्वपूर्ण फसलें मक्का, गेहूं, कच्चा अनाज, मूंगफली और दलहन हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में मवेशी और पशुपालन भी रोजगार के महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है। यहां लोग मवेशियों में गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर आदि प्रमुख रूप से पालते हैं।

पर्यटन और स्थानीय प्रमुख भोजन

छत्तीसगढ़ अपनी जंगल, धार्मिक स्थलों, और बहते झरनों के लिए प्रसिद्ध है। यहां एक छोटा सा गाँव है, जो प्रकृति की सुंदरता में समृद्ध है। सरगुजा जिले में स्थित इस गाँव को “छत्तीसगढ़ का शिमला” और “छोटा तिब्बत” कहा जाता है। यहां का तापमान कम और सर्दियों में बर्फबारी की वजह से इसे इस तरह से कहा जाता है।

छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा परंपराओं और शक्ति पूजा के लिए विख्यात है। इस गाँव में दशहरे का पर्व 75 दिन तक चलता है, जिसमें राम और रावण के स्थानीय रूपों की पूजा होती है।

यहां शिवरीनारायण धाम को “छत्तीसगढ़ जगन्नाथ पूरी” कहा जाता है, जिसे यहां प्राचीन समय में भगवान जगन्नाथ की स्थानीय रूपों का आश्रय मिला था। इस शहर में महानदी पैरी और संदूर नदियों का संगम होता है, जिसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है। यहां के पवित्र मंदिर आपको जीवन संस्कृति और समृद्धि की विरासत का अनुभव कराते हैं।

डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो राजनांदगांव जिले से लगभग 35 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यह शहर धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित देवी बमलेश्वरी के प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां का मुख्य धार्मिक स्थल, देवी बमलेश्वरी का मंदिर, बहुत ही प्राचीन है और इसे देखने के लिए पर्यटक यहां से दूर-दूर से आते हैं। डोंगरगढ़ में आने का सबसे अच्छा समय जनवरी से मार्च है, जब मौसम शानदार होता है और पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं। यहां का राजस्व, सतनामी संप्रदाय का एक अभूतपूर्व उदाहरण है, जो गिरोधपुरी धाम के रूप में खड़ा है और पर्यटकों को धार्मिक एवं ऐतिहासिक अनुभव प्रदान करता है।

इसके अलावा, जशपुर जिले में स्थित कैलाश गुफा भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है जो शिव भक्तों के बीच प्रसिद्ध है। सावन मास में, यहां के शिवलिंग पर जल चढ़ाने का अद्भुत आयोजन होता है और यह स्थान संत घिर गुरु की तप भूमि के रूप में भी प्रसिद्ध है। इसके आस-पास मौजूद अलकनंदा जलप्रपात और प्राकृतिक सौंदर्य ने इस स्थल को और भी खास बना दिया है।

प्रकृति की सुंदरता को देखने के लिए डोंगरगढ़ में एक अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो बलौदा बाजार जिले में स्थित है। यहां का पुरखौती मुक्तांगन उद्यान सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ बायोडाइवर्सिटी के संरक्षण का केंद्र भी है। इसके आस-पास के अंतागढ़ से 17 किलोमीटर दूर एक और प्राकृतिक शीतलता स्थल है, चित्रकूट जलप्रपात|

यहां मदकू द्वीप हरियाली से भरपूर है और लगभग 24 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस द्वीप में भगवान शिव,पार्वती, गणेश, नंदी और कई अन्य देवताओं की प्राचीन और अनोखी मूर्तियां हैं। यहां नए और पुराने दोनों प्रकार के मंदिर हैं, जिसे लोग दूर-दूर से देखने आते है।

छत्तीसगढ़ का ताला गांव अपने ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। खजुराहो अपने आप में पौराणिक और गौरवशाली इतिहास से भरा हुआ है। सिरपुर के पुरातत्व स्थल आपको आकर्षित करेगा। छत्तीसगढ़ का चिरमिरी अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी मशहूर है, यहां झरने, पहाड़ और नदियाँ हैं, जो इसे एक खूबसूरत हिल स्टेशन बनाती है। इस जगह की ऊँचाई समुद्र तल से 570 से 580 मीटर के बीच है|

रायपुर से लगभग 30 किलोमीटर पश्चिम में, भिलाई है, जहां भारत का सबसे बड़ा स्टील प्लांट स्थित है। साथ ही यहां भारत का सबसे लंबा सरकारी विद्युत उत्पादन और एनटीपीसी के बड़े प्लांट भी हैं।

यहां का बस्तर आपको पूरी तरह से पसंद आएगा क्योंकि यह जिला आदिवासी जनजातियों का निवास स्थान है और यहां घूमने के लिए कई सुंदर स्थान हैं।

छत्तीसगढ़ न केवल सुंदर है, बल्कि यहां का खाना भी स्वादिष्ट है। यहां का पारंपरिक भोजन, जैसे कि चिला, बहुत प्रसिद्ध है, जिसे चावल और विभिन्न सामग्रियों से बनाया जाता है। इसके अलावा, बड़ा और मुठिया भी यहां के स्वाद के लिए मशहूर हैं, जिन्हें उड़द की दाल से तैयार किया जाता है और टमाटर या इमली की चटनी के साथ परोसा जाता है। और यदि आप मिठाई के शौकीन हैं तो यहां के तिलगुड़ के लड्डू आपको अवश्य पसंद आएंगे।